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इस एपिसोड में, पैनल पशु-जन पालन उद्योग द्वारा होने वाले उच्च ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पौध-आधारित आहार अपनाने को सर्वोत्तम समाधानों में से एक के रूप में चर्चा करता है। Master: अगर हम सब अभी वीगन बन जाएं, तो हम पुरानी तकनीक को रख सकते हैं जब तक कि ईसे बदल न दी जाएं, क्योंकि वैज्ञानिकों के प्रमाणों के आधार पर किए गए गणना के अनुसार, वीगन आहार वैश्विक तापमान वृद्धि का कारण बनने वाले प्रदूषण में 80% तक कमी लाता है। और यह सबसे आसान, सबसे तेज़और सबसे सुरक्षित तरीका है जिससे हम वैश्विक तापमान के 80% को खत्म कर सकते हैं, लगभग तुरंत ही। और बाकि का, 20% अन्य सब चीजों, चाहे वो कारें हों, हवाई जहाजो हों या कुछ और, प्रकृति द्वारा पूरा किया जा सकता है। (मास्टर, आपकी टिप्पणियों के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।) असल में, प्रकृति इससे भी कहीं अधिक चीजों का ख्याल रख सकती है। बात बस इतनी सी है कि हमने उनकी क्षमता से अधिक भार डाल दिया और धरती माता के संसाधनों का अत्यधिक दुरुपयोग किया। इसलिए हमें अपने कार्यों को पलटना होगा। बहुत बढ़िया, बहुत बढ़िया। बहुत-बहुत धन्यवाद, डॉ. जिम। यह जानकर अच्छा लगा कि सरकार और अन्य सभी लोग पृथ्वी को बचाने में वास्तव में हर संभव प्रयास कर रहे हैं। मैं बहुत खुश हूँ। (डॉ. स्टीवर्ट, मेरा आपसे एक छोटा सा सवाल है, और यह सुप्रीम मास्टर जिस बारे में बात कर रहे थे उससे काफी मिलता-जुलता है। मेरा सवाल यह है कि अल गोर वीगनवाद के बारे में कभी बात क्यों नहीं करते?) Dr. Jim Stewart: मैं अल गोर की ओर से जवाब नहीं दे सकता, मैं केवल अपनी ओर से और तथ्यों के आधार पर ही बोल सकता हूं। और जैसा कि हम पहले ही चर्चा कर चुके हैं, तथ्य यह है कि यदि आप वीगन बन जाते हैं, तो आप ग्रह को बचाने में मदद करेंगे। MC:Jane Velez-Mitchell: लेकिन उनके पास ये सभी वेबसाइटें हैं। और मैंने उन वेबसाइटों से संपर्क किया और मैंने कहा, "आप लाइट बल्ब और परिवहन के बारे में क्यों बात कर रहे हैं, जबकि संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग का सबसे बड़ा कारण मांस उत्पादन है?" और आप जानते हैं कि वे क्या कहते हैं? हम उसकी बात नहीं करना चाहते। मेरे पास वह उद्धरण के रूप में था; मैंने पत्रकार के तौर पर फोन किया था। (क्या आप हमें मांस उद्योग पर अपना दृष्टिकोण बता सकते हैं, इसका हमारी वर्तमान स्थिति पर क्या प्रभाव है?) Professor Ryan Galt: हां, मैं भोजन और जलवायु परिवर्तन के बीच संबंधों के बारे में अधिक सामान्य रूप से भी बात करना चाहता था। मैं आज की दुनिया की दो ऐसी स्थितियों पर संक्षेप में प्रकाश डालते हुए शुरुआत करना चाहता हूं जिन्हें ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। एक क्षेत्र कृषि है; पृथ्वी पर मानव द्वारा भूमि का एक सबसे बड़ा उपयोग पौधों और जानवरों के उत्पादन से ही होता है। ग्रीनहाउस गैसों में कृषि का योगदान काफी विपुल है, जैसा कि आप कह रहे थे, कार्बन डाइऑक्साइड के संदर्भ में, मानवजनित उत्सर्जन का 21-25% कृषि से होता है, मीथेन का लगभग 60% कृषि से और नाइट्रस ऑक्साइड का 65-80% कृषि से होता है। और जैसा कि डॉ. सिंघ कह रहे थे, मीथेन कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में लगभग 30 गुना अधिक प्रबल है, और नाइट्रस ऑक्साइड कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में प्रति अणु भार के हिसाब से 200 गुना अधिक शक्तिशाली है। इसलिए, ये भी मायने रखते हैं; हमें उन सभी मुद्दों पर ध्यान देने की ज़रुरत है। और दूसरी बात जिस पर मैं प्रकाश डालना चाहता हूं, वह है आज दुनिया में मौजूद अत्यधिक असमानताएं। हमारे पास मुट्ठी भर अरबपतियों हैं जिनके पास दुनिया के 40 सबसे गरीब देशों के बराबर या उससे अधिक संपत्ति है। और यह लगभग तीन अरब लोग हैं, जो दुनिया की आबादी का लगभग आधा हिस्सा है। धन की यह असमानता भोजन तक पहुंच को भी प्रभावित करती है। और इसलिए, इस ग्रह पर लगभग 800 मिलियन, और अब शायद एक अरब या उससे भी अधिक लोग ऐसे हैं, जिनके पास पर्याप्त भोजन उपलब्ध नहीं है। यह जनसंख्या के लगभग छठे हिस्से के बराबर है। हमने दुनिया भर के विभिन्न देशों में खाद्य दंगों को इस असमानता की अभिव्यक्ति के रूप में देखा है। और विश्व की आर्थिक व्यवस्था मूल रूप से उन लोगों के लिए काम नहीं करती जो भोजन खरीदने का सामर्थ्य नहीं रखते। तो, मेरा मतलब यह है कि हमारे पास मूल रूप से पर्याप्त भोजन है। हमारे पास धरती पर सभी को खिलाने के लिए पर्याप्त भोजन है, लेकिन हम ऐसा नहीं कर रहे हैं। लाखों लोगों का आहार अपर्याप्त है। इसलिए, मैं उन दो प्रस्तावों पर प्रकाश डालना चाहता हूं और फिर वहीं से बात शुरू करूंगा। असल में, जैसा कि हम कहते आ रहे हैं, मांस वास्तव में महत्वपूर्ण है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, डेविस (यूसी डेविस) में स्थित ऐग्रिकल्चरल सस्तैनबिलिटी ईंस्टिट्यूट ने हाल ही में जिसे कह सकते हैं, "कम कार्बन आहार" के प्रभावों पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया, जिसका उद्देश्य आहार को जलवायु परिवर्तन के कम प्रभावों की ओर ले जाना है। और कार्यशाला से आ रही रिपोर्ट में - ध्यान दें: ये वे शिक्षाविदओ हैं जो आमतौर पर अनिश्चितता को उजागर करते हैं - "पौधे प्रोटीन बनाम पशु प्रोटीन का मुद्दा नए शोध के लिए उच्च प्राथमिकता नहीं है, क्योंकि मौजूदा शोध पहले से ही स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कर रहा है कि ऊर्जा तीव्रता और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के दृष्टिकोण से, पौधे प्रोटीन लगभग हमेशा पशुधन से प्राप्त प्रोटीन की तुलना में पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर होते हैं।" तो, हमारे पास ग्रह पर लगभग 56 बिलियन (अब 100 बिलियन से अधिक) जानवरो हैं जिनका सालाना वध किया जाता है। वे विश्व की लगभग 80% सोयाबीन की फसल और विश्व की लगभग 50% मक्का की फसल का उपभोग करते हैं। इस नजरिए से देखने पर यह काफी आश्चर्यजनक लगता है। पशुधन उत्पादन का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में योगदान परिवहन क्षेत्र की तुलना में अधिक है। यह भी काफी आश्चर्यजनक है, क्योंकि जब हम अपने उत्सर्जन को कम करने या ड्राइविंग और फ्लाइंग के विकल्पों, जैसे कि बाइक आदि के बारे में सोचते हैं, तो हम आमतौर पर ड्राइविंग और फ्लाइंग के बारे में सोचते हैं। तो, ऐसा क्यों है? मैं सिर्फ उस खाद्य श्रृंखला पर प्रकाश डालना चाहता हूं और उस पर वापस जाना चाहता हूं जो जानवरों को खिलाती है। सबसे पहले, जाहिर है, चारे के उत्पादन में जीवाश्म ईंधन का उपयोग किया जाता है। इसका मतलब यह है कि हम प्राकृतिक गैस को कृत्रिम उर्वरकों में बदल रहे हैं। यह एक बहुत ही ऊर्जा-गहन प्रक्रिया है; हम इसके लिए गैस जलाते हैं - आधुनिक कीटनाशक भी कुछ इसी तरह की चीज हैं। इसके अलावा, हम जानवरों को खिलाने के लिए उस अनाज को जीवाश्म ईंधन का उपयोग करके परिवहन करते हैं, क्योंकि हमें सघन चारागाह संचालन और चारा प्रणालियों के बीच संबंध तोड़ना पड़ता है। और, हालांकि, तीसरा सबसे महत्वपूर्ण है, और वह यह है कि जब भी कोई जीव भोजन खाता है, तो उन्हें उससे ऊर्जा मिलती है और वह उन्हें शरीर के द्रव्यमान में परिवर्तित कर देता है। लेकिन उस रूपांतरण के दौरान, आप उस भोजन में मौजूद लगभग 90% ऊर्जा खो देते हैं। हां, यह कठिन है। तो, जैसा कि हॉवर्ड कह रहे थे, "हमारे सामने ऐसी स्थिति है जिसमें एक पौंड (~ 0.45 किलोग्राम) मांस बनाने के लिए लगभग 16 पाउंड (~ 7.26 किलोग्राम) अनाज की आवश्यकता होती है।" हम जरूर एक ही किताबें पढ़ रहे होंगे। इसके अलावा, हमने मीथेन के योगदान पर भी प्रकाश डाला है, और वह यह है कि पशुधन कार्बन डाइऑक्साइड के अलावा अन्य ग्रीनहाउस गैसों में भी बहुत बड़ा योगदान देते हैं। मानव जनित मीथेन उत्सर्जन के 37% और नाइट्रस ऑक्साइड उत्सर्जन के लगभग 65% के लिए पशुपालन जिम्मेदार है - यह केवल पशुपालन की बात है। और निश्चित रूप से, हम सघन पशु चारागाह संचालन को गर्म और ठंडा करने में बहुत सारी ऊर्जा खर्च करते हैं। और इसके अलावा, वध करने के बाद मांस को ठंडा रखने और उपभोक्ता तक पहुंचाने में भी बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इन सभी प्रक्रियाओं में प्रखर ऊर्जा की खपत होती है और इसलिए ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है। इसलिए अब वैज्ञानिक समुदाय में लोग "जीवन चक्र विश्लेषण" नामक पद्धति को अपना रहे हैं, जिसमें खेत से लेकर आपके खाने की मेज तक किसी चीज को ले जाने की पूरी प्रक्रिया में शामिल विभिन्न कारकों और उनके प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। तो, जब आप ऐसा करते हैं और एक किलोग्राम गोमांस को देखते हैं, तो उससे 36 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन होता है। अगर हम सूअर के मांस की बात करें तो यह लगभग छह किलोग्राम होता है, इसलिए यह छह गुना अधिक कुशल है। लेकिन अगर हम सूखे मटर या फलियों को देखें, तो यह लगभग 0.6 (किलोग्राम) है। अगर हम इसे दूसरे तरीके से देखें, तो सूखे सेम और मटर, जो प्रति किलोग्राम प्रोटीन का पर्याप्त स्रोत हैं, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के मामले में एक किलोग्राम गोमांस की तुलना में लगभग 60 गुना अधिक कुशल हैं। बेहद विचित्र! तो मूल रूप से, अनाज से पाले गए जानवरों के मांस पर आधारित आहार की तुलना में पौधों पर आधारित आहार कहीं अधिक टिकाऊ होते हैं। औद्योगिक रूप से उत्पादित मांस की खपत कम करने से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में काफी कमी आएगी। इसके अलावा, हमें पौधे आधारित कृषि के संदर्भ में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है; यह सिर्फ पशु-आधारित नहीं है। हमें इस तथ्य से निपटना होगा कि हमारी अधिकांश पौधे-आधारित कृषि मशीनीकृत इनपुट और उर्वरकों दोनों के लिए जीवाश्म ईंधनो पर निर्भर करती है। इसलिए, जीवाश्म ईंधन के नवीकरणीय न होने की प्रकृति को देखते हुए, हमें निश्चित रूप से इस दृष्टिकोण से दूर हटना होगा। हमें दलहन फसलों – जैसे कि तिपतिया घास और अल्फाल्फा – का उपयोग बढ़ाना होगा ताकि कृत्रिम नाइट्रोजन के कारण होने वाली नाइट्रोजन की कमी को पूरा किया जा सके, जिसका उपयोग हम भविष्य में नहीं कर पाएंगे। और फिर, मैं यह भी कहना चाहता हूं, कि केवल मांस का सेवन कम करने और कृषि की स्थिरता बढ़ाने से मौजूदा खाद्य संकट का समाधान नहीं हो जाएगा। इसलिए, भले ही हम सभी अनाज ले लें या हम जो मांस खाते हैं उसमें से सभी अनाज निकाल लें, इससे भूख की समस्या हल नहीं होगी क्योंकि यह खाद्य की कमी के कारण नहीं होती, बल्कि भोजन तक पहुंच की कमी के कारण होती है, क्योंकि गरीबों की क्रय शक्ति कम होती है। अतः हमें इसकी जड़ यानी गरीबी का समाधान करना होगा। इसलिए मुझे निम्नलिखित बात आवश्यक लगती है: हमें यह समझना होगा कि हमारी वर्तमान अर्थव्यवस्था वास्तव में सत्ता को धनी लोगों के हाथों में केंद्रित करती है, और जैसा कि हॉवर्ड कह रहे थे, उनका हमारे राजनेताओं पर अनुचित प्रभाव है। हमें इस विचारधारा से भी खुद को मुक्त करना होगा कि मुक्त बाजार हमारी समस्याओं का समाधान कर देंगे। इसके बजाय, यह समझें कि बाजार के नियमो वास्तव में समाज द्वारा ही निर्धारित किए जाने चाहिए ताकि सामाजिक लक्ष्यों की पूर्ति हो सके। इसलिए, खाद्य संकट के समाधान के संदर्भ में, हम इस पर विस्तार से चर्चा कर सकते हैं, लेकिन मूल रूप से हमें विकासशील देशों को हमारी सब्सिडी वाले अनाजों पर निर्भर होने के बजाय खाद्य सुरक्षा नीतियों को आगे बढ़ाने की अनुमति देनी चाहिए। और साथ ही, हमें ग्रामीण गरीबों को सशक्त बनाना होगा, उन्हें भूमि तक पहुंच और उत्पादन के साधन उपलब्ध कराने होंगे। मूल रूप से मैं एक अधिक गहन लोकतंत्र की बात कर रहा हूँ। तो, संक्षेप में कहें तो, वैश्विक तापमान में वृद्धि और इसकी बढ़ती गति को देखते हुए, हमें व्यापक बदलाव करने की आवश्यकता है, और वह भी शीघ्रता से। औद्योगीकृत दुनिया में, इन परिवर्तनों में हमारे आहार में परिवर्तन, साथ ही हमारी परिवहन की आदतों में परिवर्तन और हमारे रहने के स्थानों के डिजाइन में परिवर्तन शामिल हैं, चाहे वह घरों के संदर्भ में हो या शहरों के संदर्भ में। यदि हम भावी पीढ़ियों के प्रति और साथ ही इस ग्रह पर मौजूद अन्य लोगों और अन्य जीवों के प्रति किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी का बोध रखते हैं, तो मेरा मानना है कि हमें मांस की खपत में भारी कमी करनी चाहिए। हमारा आहार मुख्य रूप से पौधों पर आधारित होना चाहिए। लेकिन यह पूरी तरह से हम पर निर्भर नहीं है; नीति को प्रभावित करना भी हम पर निर्भर है। इसलिए हमें ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को बिना किसी दंड के जारी रखने के दिनों को खत्म करने की जरूरत है, हमें मूल रूप से इसे समाप्त करना होगा। हमें नियमों की जरूरत है, हमें प्रोत्साहनों की जरूरत है, इन दोनों के संयोजन की जरूरत है, और हरित करों की जरूरत है जो पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर कर लगाएंगे। ख़त्म करने से पहले, मैं सुप्रीम मास्टर चिंग हाई से एक प्रश्न पूछने जा रहा था, (हाँ।) और बात यह है कि, हमने औद्योगिक मांस उत्पादन के बारे में बहुत मैं कहूंगा कि वीगन बनने के मामले में अच्छा तर्क दिया है, खासकर औद्योगिक देशों में, लेकिन नव-उपनिवेशवाद के आरोप भी लगते हैं - जब प्रथम देश विकासशील देशों को कहते हैं क्या करना है। तो, आप वीगनवाद और पशुपालन संस्कृतियों – जैसे कि फुलानी और बेदुइन – और नव-उपनिवेशवाद के आरोपों के बारे में क्या सोचते हैं? Master: धन्यवाद, प्रोफेसर गाल्ट। इस मुद्दे को उठाने के लिए धन्यवाद। देखिए, जो भी चीज प्राकृतिक है, वह अच्छी होनी चाहिए। अन्यथा, जाहिर है, यह अच्छा नहीं है। लेकिन एक बार जब हमारे ग्रह की सामाजिक संरचना स्थिर हो जाएगी और वीगन आहार, ईश्वर की कृपा और नई तकनीक आदि के कारण अर्थव्यवस्था हर जगह पूरी तरह से फल-फूल जाएगी, तो मुझे लगता है कि पशुजनन की प्रथा भी स्वाभाविक रूप से समाप्त हो जाएगी, क्योंकि व्यापक रूप से संगठित मांस उद्योग की तुलना में वे वैसे भी बहुत कम प्रतिशत हैं। हमें निश्चित रूप से वीगनवाद के महान लाभों को फैलाना चाहिए और अपने आध्यात्मिक स्तर को इस हद तक ऊपर उठाना चाहिए कि सभी मनुष्यों यह समझ सकें कि केवल एक नेक, करुणामय जीवन शैली, जैसे कि वीगन जीवन शैली, ही वास्तव में टिकाऊ है और मनुष्यों को लाभ पहुंचाती है, क्योंकि हम सृष्टि के मुकुट हैं। और, हाँ, जेन, आप भूल गई हो कि श्री अल गोर ने 19 जुलाई को ऑस्टिन, टेक्सास में एक बैठक में अचानक दौरा किया था। वह वहां मौजूद इंटरनेट का अच्छा ज्ञान रखने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं से बात कर रहे थे। यह नेटरूट्स नेशन का सम्मेलन था। जब एक पत्रकार ने उनसे वीगन भोजन के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा, "यह सच है कि वीगन भोजन लोगों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है और इससे ग्रह को बचाया जा सकता है।" तो, उन्होंने कुछ कहा तो था, शायद वेब पर नहीं, लेकिन उन्होंने कहीं और जरूर कहा था। (उत्कृष्ट! मुझे बताने के लिए धन्यवाद। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।) आपका स्वागत है। (बहुत बढ़िया!) मुझे लगता है कि उन्होंने वीगन आहार भी शुरू कर दिया है। मेरा मतलब है कि पूरी तरह से नहीं, लेकिन शायद वहाँ आधे या दो तिहाई पहले से ही वीगन हैं। आप उन्हें थोड़ा समय दीजिए। मुझे यह कहना होगा कि बहुत से लोगों के लिए यह इतना आसान नहीं है। क्योंकि यह सब उनके लिए नया है, और वे शायद सोच रहे होंगे, "क्या?! (पशु-जन) मांस के बिना मैं कैसे जी पाऊंगा? वे गाय और हाथी-जनो को भूल गए है, वे इतने विशाल हैं, और वे केवल घास और साधारण पत्तियों पर ही जीवित रहते हैं। ठीक है, धन्यवाद। (मास्टर और प्रोफेसर, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।) Photo Caption: "आकाश और धरती अभी भी दयालु हैं, इंसानों को भी उनसे सीखना चाहिए!"











